किन्नर अखाड़ा

सनातन धर्म में एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक

किन्नर अखाड़ा सनातन धर्म के भीतर एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक परिवर्तन का प्रतिनिधित्व करता है। इसका मूल उद्देश्य किन्नर समुदाय के उस गौरवपूर्ण अस्तित्व को पुनः स्थापित करना है, जो शास्त्रों और इतिहास में उपदेवताओं के रूप में वर्णित था, लेकिन समय के साथ जिसका पतन हो गया और वे एक दयनीय स्थिति में पहुँच गए। हमारा मिशन इस खोए हुए वजूद को वापस लाना और उन्हें धर्म की मुख्यधारा में पुनः स्थापित करना है व किन्नर समाज को सामाजिक कार्यो के लिए प्रोत्साहित करना ।

मुगल काल के प्रभाव से मुक्ति और सनातन धर्म की ओर वापसी

मुगल शासनकाल के दौरान किन्नर समाज का बड़े पैमाने पर इस्लामीकरण हुआ, जिसके कारण उनके पारंपरिक पहचान और सामाजिक स्थिति में गिरावट आई। किन्नर अखाड़े का एक प्रमुख उद्देश्य इस समुदाय को पुनः सनातन धर्म की ओर लौटाना और उनकी मूल आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ना है।

किन्नर समाज का उत्थान और जनकल्याण

हम किन्नर समाज की ऊर्जा का सदुपयोग करने में विश्वास रखते हैं। हमारा लक्ष्य किन्नरों को समाज सेवा, स्वयं के उत्थान और जनकल्याण की भावना से प्रेरित करना है। हम उन्हें ऐसे कार्यों में संलग्न होने के लिए प्रोत्साहित करते हैं जो समाज के लिए सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।

आध्यात्मिक पहचान और सामाजिक समावेश

हमारा विशेष मिशन ट्रांसजेंडर या किन्नर समुदाय को उनकी आध्यात्मिक पहचान दिलाना और उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ना है। हमारा मानना है कि हर व्यक्ति को अपनी धार्मिक और सामाजिक पहचान के साथ सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार है।

14वें अखाड़े के रूप में स्थापना

परंपरागत रूप से चले आ रहे 13 अखाड़े केवल स्त्री और पुरुष की मान्यता पर आधारित थे, जिससे किन्नर समाज अछूता था। किन्नर अखाड़े का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य किन्नर समुदाय के धार्मिक वजूद को 14वें अखाड़े के रूप में स्थापित करना था। यह ऐतिहासिक उपलब्धि 2016 के उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ में पूर्ण हुई, जिसने किन्नर समाज को सनातन धर्म में एक आधिकारिक और सम्मानित स्थान प्रदान किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि का पूर्ण श्रेय किन्नर अखाड़े के संस्थापक श्री ऋषि अजय दास जी को जाता है, जिनके दूरदर्शी नेतृत्व और अथक प्रयासों से यह संभव हो पाया। किन्नर अखाड़े की स्थापना श्री ऋषि अजय दास जी ने 13 अक्टूबर 2015 को की थी। उनके दूरदर्शी नेतृत्व और अथक प्रयासों से यह संभव हो पाया कि किन्नर समाज को सनातन धर्म में एक आधिकारिक और सम्मानित स्थान मिल सका।

"सेवा परमो धर्मः"

हमारा आदर्श वाक्य "सेवा परमो धर्मः" है, जो निस्वार्थ सेवा के सर्वोच्च महत्व को दर्शाता है। यह सिद्धांत हमारे सभी कार्यों का मार्गदर्शन करता है। किन्नरों के लिए, किन्नरों के द्वारा, विश्व कल्याण की भावना हमारा अखाड़ा किन्नरों द्वारा, किन्नरों के लिए समर्पित है, जिसका लक्ष्य विश्व कल्याण की भावना को बढ़ावा देना है। हम एक ऐसे समाज की कल्पना करते हैं जहां सभी को समान सम्मान, अवसर और आध्यात्मिक पहचान मिले।

हमारे उद्देश्य:

  • किन्नर समुदाय को सनातन धर्म में उनकी खोई हुई प्रतिष्ठा और पहचान पुनः दिलाना।
  • किन्नरों को समाज सेवा और जनकल्याण के कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल करना।
  • किन्नर समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन और शिक्षा प्रदान करना।
  • समाज में किन्नरों के प्रति सम्मान और स्वीकृति को बढ़ावा देना।
  • किन्नरों को मुख्यधारा के समाज से जोड़ना और उनके अधिकारों की रक्षा करना।
  • हमारा दृष्टिकोण:

    एक समावेशी और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध समाज का निर्माण करना जहाँ किन्नर समुदाय को न केवल स्वीकार किया जाए, बल्कि उनकी अद्वितीय भूमिका और योगदान के लिए उन्हें सम्मानित भी किया जाए।

    जुड़ें और समर्थन करें:

    हम आपको इस नेक पहल का हिस्सा बनने और किन्नर अखाड़े के मिशन का समर्थन करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

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